बेंगलुरु: पीएम मोदी बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग परिसर में बने विशेष ध्यान केंद्र 'ध्यान मंदिर' का उद्घाटन किया। इस मौके पर गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर भी मौजूद रहे। बता दें कि श्री श्री रविशंकर के जन्मदिवस समारोह को आर्ट ऑफ लिविंग के द्वारा धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसी मौके पर पीएम मोदी भी बेंगलुरु पहुंचे हैं। श्री श्री रविशंकर 13 मई को 70 वर्ष के हो जाएंगे।
ध्यान मंदिर क्या है?
'ध्यान मंदिर' आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में बनाया गया नया ध्यान कक्ष है। इसकी क्षमता 20 हजार लोगों के बैठने की है। इसका एरिया 1.06 Sqft है। इसमें 65 हजार Sqft का रूफ गार्डन भी है।
निचले तल पर एक भव्य और आधुनिक हॉल है, जो अत्याधुनिक ऑडियो-विजुअल सुविधाओं से पूरी तरह लैस है। यहां साल भर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन के लिए एक मुख्य मंच के साथ-साथ होम (हवन) के लिए अलग मंच भी उपलब्ध है। मंच क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली ऑडियो-विजुअल व्यवस्था और वीडियो रिकॉर्डिंग की पूरी सुविधा मौजूद है। मंच के पीछे फुल-लेंथ डिजिटल स्क्रीन लगी हुई है, जबकि हॉल के अंदर भी अतिरिक्त डिजिटल स्क्रीन लगाई गई हैं। आधुनिक डिज़ाइन वाला साउंड सिस्टम और अनुवादक केबिन भी उपलब्ध हैं, जिससे कार्यक्रम सुचारू रूप से संचालित हो सकें।
हॉल को बेहतर प्रबंधन के लिए कई ज़ोन में बांटा गया है। हर ज़ोन में अलग-अलग प्रवेश-निकास द्वार, शो रैक, वाटर कूलर आदि की सुविधा है। पुरुष और महिला शौचालय पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं। इसके अलावा यहां स्मारिका दुकानें, कैफे, पीने के पानी की व्यवस्था, आपातकालीन निकासी मार्ग, अग्निशमन प्रणाली और एम्बुलेंस सुविधा भी मौजूद है। बैकस्टेज क्षेत्र में ग्रीन रूम और वीआईपी लाउंज की सुविधा दी गई है। सबसे खास बात यह है कि ऊपरी छत पर स्थित हरे-भरे गार्डन तक सीधी पहुंच है। इसके अतिरिक्त 6,500 वर्ग फुट में फैला सुंदर प्लाज़ा और सार्वजनिक मनोरंजन क्षेत्र भी शामिल है। यह पूरा सेटअप आगंतुकों और कार्यक्रम आयोजकों दोनों के लिए बेहद सुविधाजनक और आकर्षक बनाया गया है।
जब शताब्दी समारोह होगा, मैं उसमें शामिल होने के लिए फिर आऊंगा: PM मोदी
पीएम मोदी ने कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "आज गुरुदेव के 70 साल का ये कार्यक्रम है। जब शताब्दी समारोह होगा, मैं उसमें शामिल होने के लिए फिर आऊंगा। आज इस दिव्य और भव्य ध्यान मंदिर का लोकार्पण हुआ है। जब संकल्प स्पष्ट हो और सेवा भाव से कार्य किया जाए, तो हर प्रयास के सुखद परिणाम मिलते हैं।"
पीएम मोदी ने कहा, "बाकी कुछ हो या ना हो, हम सब लोटस की छत्रछाया में हैं और गुरुदेव का आशीर्वाद है, तो लोटस की छत्रछाया ही देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।" उन्होंने कहा, "आज की ये सुबह एक अलग अनुभूति लेकर आई है। बच्चों के वैदिक मंत्रों से स्वागत, भगवान श्री गणेश के दर्शन, श्री श्री रविशंकर जी के 70 वर्ष और Art of living के 70 वर्ष, ये ऐसे पल हैं, जो हमेशा मेरी स्मृतियों में रहेंगे। गुरुदेव ने सही कहा कि मेरा धन्यवाद नहीं हो सकता। मैं आपका ही हूं, आपके बीच ही आया हूं और आपके लिए ही आया हूं और जहां हूं, वहां भी आपके ही कारण हूं।"
पीएम मोदी ने कहा, "बेंगलुरु का माहौल, यहां का वातावरण, कुछ अलग ही होता है। ये शहर सॉफ्टवेयर और सर्विसेज के लिए दुनियाभर में जाना जाता है लेकिन भारत की सांस्कृतिक पहचान, धार्मिकता, आध्यात्मिक चेतना को भी इस शहर ने नई ऊंचाई दी है।"

समाज की शक्ति के बारे में समझाया
पीएम मोदी ने कहा, "कोई भी अभियान तब सफल होता है, जब उसके साथ समाज की शक्ति जुड़ जाती है। इसलिए, ऐसे हर महत्वपूर्ण मिशन के लिए समाज की शक्ति को जागृत करना बहुत आवश्यक है। मेरा हमेशा से विश्वास रहा है कि समाज, राजनीति और सरकारों से भी अधिक शक्तिशाली होता है। कोई भी सरकार तभी सफल हो सकती है, जब समाज स्वयं राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाता है।"
उन्होंने कहा, "मैं एक और बात के लिए यहां उपस्थित हर व्यक्ति की प्रशंसा करूंगा, वो है युवा शक्ति पर फोकस। आज की दुनिया में बहुत तेजी से बड़े-बड़े परिवर्तन हो रहे हैं। हर दिन विज्ञान नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। नई नई इनोवेशन पूरी की पूरी इकोनॉमी को बदल रही है। भारत इस बदलाव में केवल भागीदारी नहीं कर रहा, वो कई क्षेत्रों में नेतृत्व भी कर रहा है।"
उन्होंने कहा, "हमारी डिजिटल क्रांति ने भारत को डिजिटल पेमेंट में ग्लोबल लीडर बनाया है। आज इंफ्रास्ट्रक्चर भी अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है और भविष्य के विजन के साथ आगे बढ़ रहा है। स्टार्टअप में भारत बहुत तेजी से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम बना है। हमारे युवा आज स्पेस में अपनी सैटेलाइट भेज रहे हैं। देश की ऐसी सभी उपलब्धियों का सबसे बड़ा कारण हमारे युवा और Art of living है।"